Gopal Gupta

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चहता हूँ

फ़लक पर नाम लिखना चाहता हूँ,
सितारे तोड़....... लाना चाहता हूँ,,

मिरा खुद से भी लड़ना है ज़रूरी,
कि किस्मत आज़माना चाहता हूँ,,

ग़ज़ल को सींच कर ख़ूने जिगर से,
नई ता'मीर ........गढ़ना चाहता हूँ,,

लिए कुर्बत खड़ा है ... आसमाँ वो,
जमीं से मै...... मिलाना चाहता हूँ,,

नहीं महलों कि कोई चाह मुझ को,
दिलों में मै .... ठिकाना चाहता हूँ,,

उसे आदत है... रस्ता रोकने की,
हवा का रुख बदल-ना चाहता हूँ,,

सुना है मौत का आना है निश्चित,
शरारों पे.  .. मचलना चाहता हूँ,,
Gopal Gupta  "Gupta"

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5 Comments

Gunjan Kamal

24-Jun-2023 11:51 PM

👏👌

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वानी

24-Jun-2023 10:18 AM

Nice

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वाह,,, बहुत ही सुंदर और बेहतरीन अभिव्यक्ति

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